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mahabharat 3.168.48: महाराज! शत्रुसूदन! स्वर्ग के देवताओं को कभी पश्चाताप नहीं होता। उनमें क्रोध और लोभ का भी अभाव होता है। 48॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.168.48 
दिवौकसां महाराज न ग्लानिररिमर्दन।
न क्रोधलोभौ तत्रास्तां सुरादीनां विशाम्पते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शत्रुसूदन! स्वर्ग के देवताओं को कभी पश्चाताप नहीं होता। उनमें क्रोध और लोभ का भी अभाव होता है। 48॥
 
Maharaj! Shatrusudan! The heavenly gods never feel remorse. They also lack anger and greed. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)