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चोदयामास स हयान् मनोमारुतरंहस:॥ ३६॥
मातलिर्हयतत्त्वज्ञो यथावद् भूरिदक्षिण:।
अनुवाद
मातलि घुड़सवारी कला में पारंगत थे। सारथी के कार्य में वे अत्यंत कुशल थे। वे मन और वायु के समान वेगवान घोड़ों को उचित रीति से आगे बढ़ाते थे।
Matali was well versed in the art of horse riding. He was very skilled in the work of a charioteer. He moved the horses forward in a proper manner which were as fast as the mind and the wind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥