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mahabharat 3.168.34: 'महाबाहो! उनसे मिलकर तुम्हें कृतार्थ होना चाहिए और अब आवश्यक कार्य करना चाहिए। इस शरीर से देवताओं के लोक में विचरण करो और पुण्यात्मा पुरुषों के लोकों को देखो। 34॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.168.34 
संसिद्धॺस्व महाबाहो कुरु कार्यमनन्तरम्।
पश्य पुण्यकृताँल्लोकान् सशरीरो दिवं व्रज॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'महाबाहो! उनसे मिलकर तुम्हें कृतार्थ होना चाहिए और अब आवश्यक कार्य करना चाहिए। इस शरीर से देवताओं के लोक में विचरण करो और पुण्यात्मा पुरुषों के लोकों को देखो। 34॥
 
'Mahabaho! You should be grateful after meeting them and now do the necessary work. Walk in the world of gods with this body and see the worlds of virtuous people. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)