श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.168.33 
लोकपालेषु यातेषु मामुवाचाथ मातलि:।
द्रष्टुमिच्छति शक्रस्त्वां देवराजो महाद्युते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब समस्त लोकपाल चले गए, तब मातलि ने मुझसे कहा - 'हे महारथी! देवताओं के राजा इन्द्र आपसे मिलना चाहते हैं॥ 33॥
 
When all the Lokpalas had left, Matali said to me - 'O mighty warrior! The king of the gods, Indra, wishes to meet you.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)