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mahabharat 3.168.28: इन्द्र बोले - धनंजय ! मैंने तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए उपरोक्त बात कही थी । शस्त्रविद्या में तुमने जो गहरी रुचि दिखाई है, वह तुम्हारे जैसे पुत्र के लिए शोभा देती है ॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.168.28 
इन्द्र उवाच
परीक्षार्थं मयैतत् ते वाक्यमुक्तं धनंजय।
ममात्मजस्य वचनं सूपपन्नमिदं तव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले - धनंजय ! मैंने तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए उपरोक्त बात कही थी । शस्त्रविद्या में तुमने जो गहरी रुचि दिखाई है, वह तुम्हारे जैसे पुत्र के लिए शोभा देती है ॥ 28॥
 
Indra said - Dhananjay! I said the above to test you. The keen interest you have shown in the art of weapons is befitting a son like you.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)