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mahabharat 3.168.22: 'शत्रुसूदन! अब तुम्हें और भी उत्तम तप करना होगा और अवश्य ही स्वर्ग में प्रवेश करना होगा॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.168.22 
भूयश्चैव च तप्तव्यं तपश्चरणमुत्तमम्।
स्वर्गं त्ववश्यं गन्तव्यं त्वया शत्रुनिषूदन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'शत्रुसूदन! अब तुम्हें और भी उत्तम तप करना होगा और अवश्य ही स्वर्ग में प्रवेश करना होगा॥ 22॥
 
'Shatrusudan! Now you have to perform even better penance and you must definitely enter the heaven.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)