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श्लोक  3.168.20 
पुरैवागमनादस्माद् वेदाहं त्वां धनंजय।
अत: परं त्वहं वै त्वां दर्शये भरतर्षभ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'भरतश्रेष्ठ धनंजय! यहाँ आने से पहले ही मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानता था। इसके बाद मैंने तुम्हें दर्शन दिए हैं।'
 
'Bharat's best Dhananjay! I knew everything about you before coming here. After this I have given you darshan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)