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mahabharat 3.168.14: जब मैंने दक्षिण दिशा की ओर देखा तो वहाँ यमराज खड़े हुए दिखाई दिए। वरुण और देवराज इन्द्र भी पश्चिम और पूर्व दिशा में अपने-अपने स्थान पर खड़े थे॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.168.14 
दक्षिणस्यां दिशि यमं प्रत्यपश्यं व्यवस्थितम्।
वरुणं देवराजं च यथास्थानमवस्थितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने दक्षिण दिशा की ओर देखा तो वहाँ यमराज खड़े हुए दिखाई दिए। वरुण और देवराज इन्द्र भी पश्चिम और पूर्व दिशा में अपने-अपने स्थान पर खड़े थे॥ 14॥
 
When I looked towards the south, I saw Yamraj standing there. Varuna and Devraja Indra also stood in their respective places in the west and east directions.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)