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mahabharat 3.168.12: तत्पश्चात्, कुछ ही देर में इन्द्र, शची तथा सभी देवताओं के साथ, नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित हरे घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे एक सुन्दर रथ पर सवार होकर वहाँ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 3.168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.168.12 
ततो मरुत्वान् हरिभिर्युक्तैर्वाहै: स्वलङ्कृतै:।
शचीसहायस्तत्रायात् सह सर्वैस्तदामरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, कुछ ही देर में इन्द्र, शची तथा सभी देवताओं के साथ, नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित हरे घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे एक सुन्दर रथ पर सवार होकर वहाँ पहुँचे।
 
Thereafter, in a short while Indra along with Shachi and all the gods arrived there in a beautiful chariot drawn by green horses adorned with various ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)