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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.167.52 
उवाच च महादेवो दत्त्वा मेऽस्त्रं सनातनम्।
न प्रयोज्यं भवेदेतन्मानुषेषु कथञ्चन॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी ने मुझे अपना शाश्वत अस्त्र देकर पुनः कहा- 'इस अस्त्र का प्रयोग तुम किसी भी प्रकार मनुष्यों पर मत करना।
 
After giving me his eternal weapon, Mahadevji again said - 'You should not use this weapon on humans in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)