Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.167.40-41: पहले तो मैंने उसे घूँसों और थप्पड़ों से मारना चाहा, पर मैं उसे काबू में न कर सका और निश्चल होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। महाराज! तब वह दिव्य सत्ता हँसी और मेरे सामने खड़ी स्त्रियों के साथ वहीं अदृश्य हो गई। 40-41। | mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पहले तो मैंने उसे घूँसों और थप्पड़ों से मारना चाहा, पर मैं उसे काबू में न कर सका और निश्चल होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। महाराज! तब वह दिव्य सत्ता हँसी और मेरे सामने खड़ी स्त्रियों के साथ वहीं अदृश्य हो गई। 40-41।
First I tried to fight him with punches and slaps, but I could not control him and I fell down on the ground, motionless. Maharaj! Then that divine being laughed and disappeared right there along with the women in front of me. 40-41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥