श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.167.39 
हतेष्वस्त्रेषु सर्वेषु भक्षितेष्वायुधेषु च।
मम तस्य च भूतस्य बाहुयुद्धमवर्तत॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब मेरे सब अस्त्र-शस्त्र नष्ट होकर उसके आहार बन गए, तब उस अलौकिक पुरुष के साथ मेरा मल्लयुद्ध आरम्भ हुआ ॥39॥
 
When all my weapons were destroyed and became food for him, then my wrestling match with that supernatural being began. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)