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mahabharat 3.167.38: तब मैंने अपना धनुष और दोनों अक्षय तरकश लेकर सहसा उस दिव्य पुरुष पर आक्रमण करना आरम्भ किया, किन्तु उसने उन सबको अपना आहार बना लिया ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.167.38 
ततोऽहं धनुरादाय तथाक्षय्ये महेषुधी।
सहसाभ्यहनं भूतं तान्यप्यस्त्राण्यभक्षयत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने अपना धनुष और दोनों अक्षय तरकश लेकर सहसा उस दिव्य पुरुष पर आक्रमण करना आरम्भ किया, किन्तु उसने उन सबको अपना आहार बना लिया ॥38॥
 
Then I took my bow and both the inexhaustible quivers and suddenly began to attack that divine being, but he made them all his food. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)