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mahabharat 3.167.35: फिर वह अस्त्र प्रज्वलित बाणों द्वारा सम्पूर्ण दिशाओं में घूमने लगा। मेरे महान् अस्त्र से प्रेरणा पाकर वह ब्रह्मास्त्र और भी अधिक वेग से चलने लगा। 35.   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.167.35 
तत: प्रज्वलितैर्बाणै: सर्वत: सोपचीयते।
उपचीयमानश्च मया महास्त्रेण व्यवर्धत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
फिर वह अस्त्र प्रज्वलित बाणों द्वारा सम्पूर्ण दिशाओं में घूमने लगा। मेरे महान् अस्त्र से प्रेरणा पाकर वह ब्रह्मास्त्र और भी अधिक वेग से चलने लगा। 35.
 
Then that weapon started moving in all directions with the blazing arrows. Getting the inspiration to move from my great weapon, that Brahmastra started moving with greater speed. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)