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mahabharat 3.167.33: स्थूनाकर्ण 1, वरुणास्त्र 2, भयंकर शर्वर्षास्त्र 3, शलभस्त्र 4 और अश्मवर्ष 5 इन अस्त्रों की सहायता से मैंने उस किरात पर आक्रमण किया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.167.33 
स्थूणाकर्णमथो जालं शरवर्षमथोल्बणम्।
शलभास्त्रमश्मवर्षं समास्थायाहमभ्ययाम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
स्थूनाकर्ण 1, वरुणास्त्र 2, भयंकर शर्वर्षास्त्र 3, शलभस्त्र 4 और अश्मवर्ष 5 इन अस्त्रों की सहायता से मैंने उस किरात पर आक्रमण किया ॥33॥
 
With the help of the weapons Sthunakarna 1, Varunastra 2, the fierce Sharvarshastra 3, Shalabhastra 4 and Ashmavarsha 5, I attacked that Kirat. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)