Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.167.31: परन्तु मैं उससे भी उसे नहीं मार सका। यह एक विचित्र घटना थी। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब वायव्यास्त्र निष्फल सिद्ध हुआ। 31.   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.167.31 
न चैनमशकं हन्तुुुं तदद्‍भुतमिवाभवत्।
तस्मिन् प्रतिहते चास्त्रे विस्मयो मे महानभूत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं उससे भी उसे नहीं मार सका। यह एक विचित्र घटना थी। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब वायव्यास्त्र निष्फल सिद्ध हुआ। 31.
 
But I could not kill him even with that. This was a strange incident. I was very surprised when the Vayavyastra proved ineffective. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)