Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.167.29-30: कभी-कभी उसका शरीर बहुत छोटा हो जाता, किन्तु उसका सिर बहुत बड़ा दिखाई देता। फिर वह विशाल शरीर धारण कर लेता और अपना सिर बहुत छोटा कर लेता। राजन! अन्त में वह एक ही रूप में प्रकट हुआ और युद्ध में मेरा सामना करने लगा। भरतर्षभ! जब बाणों की वर्षा करने पर भी मैं उसे युद्ध में परास्त न कर सका, तब मैंने महान् वायव्यास्त्र का प्रयोग किया। | mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कभी-कभी उसका शरीर बहुत छोटा हो जाता, किन्तु उसका सिर बहुत बड़ा दिखाई देता। फिर वह विशाल शरीर धारण कर लेता और अपना सिर बहुत छोटा कर लेता। राजन! अन्त में वह एक ही रूप में प्रकट हुआ और युद्ध में मेरा सामना करने लगा। भरतर्षभ! जब बाणों की वर्षा करने पर भी मैं उसे युद्ध में परास्त न कर सका, तब मैंने महान् वायव्यास्त्र का प्रयोग किया।
Sometimes his body would become very small, but his head would appear very large. Then he would assume a huge body and make his head very small. King! At last he appeared in a single form and started facing me in battle. Bharatarshabha! When I could not defeat him in battle even after showering arrows, then I used the great Vayavyastra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥