Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.167.28: भरत! तब उसके सारे शरीर एक हो गए। महाराज! उस एक रूप में भी मैंने उसे पुनः अच्छी तरह घायल कर दिया॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.167.28 
पुनस्तानि शरीराणि एकीभूतानि भारत।
अदृश्यन्त महाराज तान्यहं व्यधमं पुन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भरत! तब उसके सारे शरीर एक हो गए। महाराज! उस एक रूप में भी मैंने उसे पुनः अच्छी तरह घायल कर दिया॥ 28॥
 
Bharat! Then all his bodies appeared as one. Maharaj! Even in that one form, I again wounded him well.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)