vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा
»
श्लोक 27
श्लोक
3.167.27
तस्य तच्छतधा रूपमभवच्च सहस्रधा।
तानि चास्य शरीराणि शरैरहमताडयम्॥ २७॥
अनुवाद
उस समय उसके सैकड़ों-हजारों रूप प्रकट हुए और मैंने बाणों से उसके सब शरीरों पर गहरी चोट पहुँचाई॥27॥
At that time hundreds and thousands of his forms appeared and I inflicted deep wounds on all his bodies with arrows.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×