श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.167.24 
एष ते निशितैर्बाणैर्दर्पं हन्मि स्थिरो भव।
स धनुष्मान् महाकायस्ततो मामभ्यभाषत॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, उस विशालकाय एवं धनुर्धर किरात ने उस समय मुझसे यह भी कहा - 'ठीक है, ठहरो। मैं अपने तीखे बाणों से तुम्हारा गर्व चूर-चूर कर दूँगा।'
 
Not only this, that huge and archer Kirat also said to me at that time - 'Okay, wait. I will shatter your pride with my sharp arrows.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)