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mahabharat 3.167.21: फिर मैंने अपना धनुष और अक्षय तरकश लेकर उस रोमांचकारी सूअर पर एक ही बाण से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.167.21 
ततोऽहं धनुरादाय तथाक्षय्ये महेषुधी।
अताडयं शरेणाथ तद् भूतं लोमहर्षणम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने अपना धनुष और अक्षय तरकश लेकर उस रोमांचकारी सूअर पर एक ही बाण से प्रहार किया।
 
Then taking my bow and my inexhaustible quiver, I struck that thrilling boar with a single arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)