Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.167.2: पाण्डु नन्दन को अर्जुन को प्रणाम करते देख युधिष्ठिर बहुत प्रसन्न हुए और उनका सिर सूँघकर हर्षित वाणी में बोले- 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.167.2 
अभिवादयमानं तं मूर्ध्न्युपाघ्राय पाण्डवम्।
हर्षगद्‍गदया वाचा प्रहृष्टोऽर्जुनमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नन्दन को अर्जुन को प्रणाम करते देख युधिष्ठिर बहुत प्रसन्न हुए और उनका सिर सूँघकर हर्षित वाणी में बोले- 2॥
 
Yudhishthir was very happy to see Pandu Nandan saluting Arjuna and after smelling his head he said in a joyful voice - 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)