Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.167.16-17: इसी प्रकार दूसरा महीना भी मैंने केवल जल पीकर बिताया। हे पाण्डवपुत्र! तीसरे महीने मैं पूर्णतः निराहार रहा। चौथे महीने मैं हाथ ऊपर उठाकर खड़ा रहा। इतना सब होने पर भी मेरा बल क्षीण नहीं हुआ, यह आश्चर्य की बात थी। 16-17 | mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्वितीयश्चापि मे मासो जलं भक्षयतो गत:।
निराहारस्तृतीयेऽथ मासे पाण्डवनन्दन॥ १६॥
ऊर्ध्वबाहुश्चतुर्थं तु मासमस्मि स्थितस्तदा।
न च मे हीयते प्राणस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ १७॥
अनुवाद
इसी प्रकार दूसरा महीना भी मैंने केवल जल पीकर बिताया। हे पाण्डवपुत्र! तीसरे महीने मैं पूर्णतः निराहार रहा। चौथे महीने मैं हाथ ऊपर उठाकर खड़ा रहा। इतना सब होने पर भी मेरा बल क्षीण नहीं हुआ, यह आश्चर्य की बात थी। 16-17
Similarly, I spent the second month also drinking only water. O son of Pandavas! In the third month I remained completely without any food. In the fourth month I stood with my hands raised upwards. Even after all this, my strength did not diminish, this was a surprising thing. 16-17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥