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mahabharat 3.166.9: महाबली अर्जुन ने भी इन्द्र को प्रणाम किया और सेवक की भाँति विनम्रतापूर्वक उनके पास खड़े हो गये।   |   mahabharat अध्याय 3.166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.166.9 
धनंजयश्च तेजस्वी प्रणिपत्य पुरंदरम्।
भृत्यवत् प्रणतस्तस्थौ देवराजसमीपत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाबली अर्जुन ने भी इन्द्र को प्रणाम किया और सेवक की भाँति विनम्रतापूर्वक उनके पास खड़े हो गये।
 
The illustrious Arjuna also bowed to Indra and stood beside him humbly like a servant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)