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mahabharat 3.166.8: यज्ञों में प्रचुर दक्षिणा देने वाले युधिष्ठिर ने शास्त्रों में वर्णित रीति से अमितबुद्धि इन्द्र का विधिपूर्वक स्वागत किया॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.166.8 
पूजयामास चैवाथ विधिवद् भूरिदक्षिण:।
यथार्हममितात्मानं विधिदृष्टेन कर्मणा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यज्ञों में प्रचुर दक्षिणा देने वाले युधिष्ठिर ने शास्त्रों में वर्णित रीति से अमितबुद्धि इन्द्र का विधिपूर्वक स्वागत किया॥8॥
 
Yudhishthir, who gives abundant dakshina in yagyas, duly welcomed Amitbuddhi Indra in the manner described in the scriptures. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)