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mahabharat 3.166.2: उसी समय देवताओं के समस्त वाद्यों की गड़गड़ाहट भरी ध्वनि अंतरिक्ष में गूंज उठी॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.166.2 
एतस्मिन्नेव काले तु सर्ववादित्रनि:स्वन:।
बभूव तुमुल: शब्दस्त्वन्तरिक्षे दिवौकसाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसी समय देवताओं के समस्त वाद्यों की गड़गड़ाहट भरी ध्वनि अंतरिक्ष में गूंज उठी॥2॥
 
At the same time, the thunderous sound of all the musical instruments of the Gods echoed in the space. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)