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mahabharat 3.166.15: कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर से ऐसा कहकर इन्द्र महर्षियों से अपनी स्तुति सुनकर सानंद स्वर्ग को चले गए ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 166: इन्द्रका पाण्डवोंके पास आना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर स्वर्गको लौटना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.166.15 
एकमुक्त्वा सहस्राक्ष: कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
जगाम त्रिदिवं हृष्ट: स्तूयमानो महर्षिभि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर से ऐसा कहकर इन्द्र महर्षियों से अपनी स्तुति सुनकर सानंद स्वर्ग को चले गए ॥15॥
 
Saying this to Kuntinandan Yudhishthira, Indra went to Sanand heaven after hearing his praise from the great sages. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)