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mahabharat 3.165.8: साथ ही, अत्यन्त प्रसन्नता में भरकर उन्होंने देवराज इन्द्र के समान मातलिका के साथ उत्तम व्यवहार किया। तत्पश्चात् पाण्डवों ने मातलि से समस्त देवताओं का कुशल-क्षेम पूछा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.165: अर्जुनका गन्धमादन पर्वतपर आकर अपने भाइयोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 165: अर्जुनका गन्धमादन पर्वतपर आकर अपने भाइयोंसे मिलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.165.8 
ते मातलेश्चक्रुरतीव हृष्टा:
सत्कारमग्रॺं सुरराजतुल्यम्।
सर्वान् यथावच्च दिवौकसस्ते
पप्रच्छुरेनं कुरुराजपुत्रा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
साथ ही, अत्यन्त प्रसन्नता में भरकर उन्होंने देवराज इन्द्र के समान मातलिका के साथ उत्तम व्यवहार किया। तत्पश्चात् पाण्डवों ने मातलि से समस्त देवताओं का कुशल-क्षेम पूछा॥8॥
 
At the same time, filled with immense joy, he treated Matalika in the best possible manner like Devraj Indra. After this, the Pandavas asked Matali about the well-being of all the gods. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)