Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.165.13-14: मेरे उत्तम आचरण और मन की एकाग्रता के कारण इन्द्रसहित समस्त देवता मुझ पर अत्यन्त प्रसन्न हुए। निष्कलंक कर्म करने वाले अर्जुन ने उन्हें अपने स्वर्गवास का सारा समाचार संक्षेप में सुनाया और नकुल तथा सहदेव के साथ उस आश्रम में निश्चिन्त होकर सो गए॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 3.165: अर्जुनका गन्धमादन पर्वतपर आकर अपने भाइयोंसे मिलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे उत्तम आचरण और मन की एकाग्रता के कारण इन्द्रसहित समस्त देवता मुझ पर अत्यन्त प्रसन्न हुए। निष्कलंक कर्म करने वाले अर्जुन ने उन्हें अपने स्वर्गवास का सारा समाचार संक्षेप में सुनाया और नकुल तथा सहदेव के साथ उस आश्रम में निश्चिन्त होकर सो गए॥13-14॥
‘All the gods including Indra were very pleased with me due to my good conduct and concentration of mind. Arjuna, who performed blameless deeds, told them all the news of his heavenly stay in brief and slept in that hermitage with Nakul and Sahadeva without any worries.॥ 13-14॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि निवातकवचयुद्धपर्वण्यर्जुनसमागमे पञ्चषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत निवातकवचयुद्धपर्वमें अर्जुनसमागमविषयक एक सौ पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर १४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥