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mahabharat 3.165.11-12: तत्पश्चात्, उन श्रेष्ठ पाण्डवों तथा सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी ब्रह्मर्षियों के मध्य बैठकर अर्जुन ने अपना सारा समाचार यथार्थ रूप में कह सुनाया - 'मैंने साक्षात् इन्द्र, वायु और शिव से दिव्यास्त्रों की शिक्षा प्राप्त की है।' 11-12॥   |   mahabharat अध्याय 3.165: अर्जुनका गन्धमादन पर्वतपर आकर अपने भाइयोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 165: अर्जुनका गन्धमादन पर्वतपर आकर अपने भाइयोंसे मिलना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  3.165.11-12 
तत: स तेषां कुरुपुङ्गवानां
तेषां च सूर्याग्निसमप्रभाणाम्॥ ११॥
विप्रर्षभाणामुपविश्य मध्ये
सर्वं यथावत् कथयांबभूव।
एवं मयास्त्राण्युपशिक्षितानि
शक्राच्च वाताच्च शिवाच्च साक्षात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, उन श्रेष्ठ पाण्डवों तथा सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी ब्रह्मर्षियों के मध्य बैठकर अर्जुन ने अपना सारा समाचार यथार्थ रूप में कह सुनाया - 'मैंने साक्षात् इन्द्र, वायु और शिव से दिव्यास्त्रों की शिक्षा प्राप्त की है।' 11-12॥
 
Thereafter, sitting in the midst of those great Pandavas and the Brahmarshies who were as bright as the sun and fire, Arjun narrated all his news in its true form. 'I have received the teachings of divine weapons from Indra, Vayu and Shiva in person.' 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)