Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.164.9: वहाँ रहकर, पुरुषसिंह वीर पाण्डवों ने सूर्यदेव को उदय और अस्त होते हुए स्पष्ट रूप से देखा, जिनकी शरण में आकर तेजस्वी अग्निदेव समस्त स्थावर-जंगम प्राणियों का पोषण करते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.164.9 
यमास्थित: स्थावरजङ्गमानि
विभावसुर्भावयतेऽमितौजा:।
तस्योदयं चास्तमनं च वीरा-
स्तत्र स्थितास्ते ददृशुर्नृसिंहा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहकर, पुरुषसिंह वीर पाण्डवों ने सूर्यदेव को उदय और अस्त होते हुए स्पष्ट रूप से देखा, जिनकी शरण में आकर तेजस्वी अग्निदेव समस्त स्थावर-जंगम प्राणियों का पोषण करते हैं॥9॥
 
Staying there, the brave Pandavas, who are the lions of men, could clearly see the rising and setting of the Sun, in whose refuge the illustrious Agnidev (fire god) nourishes all the mobile and immobile creatures.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)