Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.164.8: वीर जनमेजय! पर्वतराज गन्धमादन के तेज और वहाँ की मन्त्रमयी औषधियों के प्रभाव से वहाँ निरन्तर प्रकाश रहने के कारण दिन-रात का कोई भेद नहीं था॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.164.8 
स्वतेजसा तस्य नगोत्तमस्य
महौषधीनां च तथा प्रभावात्।
विभक्तभावो न बभूव कश्चि-
दहोनिशानां पुरुषप्रवीर॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वीर जनमेजय! पर्वतराज गन्धमादन के तेज और वहाँ की मन्त्रमयी औषधियों के प्रभाव से वहाँ निरन्तर प्रकाश रहने के कारण दिन-रात का कोई भेद नहीं था॥8॥
 
Brave Janamejaya! There was no division of day and night due to the constant light prevailing there due to the power of mountain king Gandhamadan and the influence of the magical herbs there. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)