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mahabharat 3.164.5: उस विशाल शिला पर स्वयं भगवान कुबेर ने अनेक सुंदर सरोवर बनाए थे, जो कमल पुष्पों से आच्छादित थे। उनका जल शैवाल आदि से आच्छादित था और उनमें हंस, करण्डव आदि पक्षी सुखपूर्वक निवास करते थे। पांडवों ने उन सरोवरों को देखा।   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.164.5 
साक्षात् कुबेरेण कृताश्च तस्मिन्
नगोत्तमे संवृतकूलरोधस:।
कादम्बकारण्डवहंसजुष्टा:
पद्माकुला: पुष्करिणीरपश्यन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस विशाल शिला पर स्वयं भगवान कुबेर ने अनेक सुंदर सरोवर बनाए थे, जो कमल पुष्पों से आच्छादित थे। उनका जल शैवाल आदि से आच्छादित था और उनमें हंस, करण्डव आदि पक्षी सुखपूर्वक निवास करते थे। पांडवों ने उन सरोवरों को देखा।
 
On that great rock, Lord Kubera himself had made many beautiful lakes, which were covered with lotus flowers. Their water was covered with algae etc. and birds like swans, Karandava etc. lived happily in them. The Pandavas saw those lakes. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)