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mahabharat 3.164.4: उस महान पर्वत के शिखर मोर और हंसों की ध्वनि से गूंज रहे थे। सर्वत्र सुन्दर पुष्प खिल रहे थे। उन सुन्दर शिखरों को देखते हुए पाण्डव बड़े आनन्द से वहाँ रहने लगे ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.164.4 
मयूरहंसस्वननादितानि
पुष्पोपकीर्णानि महाचलस्य।
शृङ्गाणि सानूनि च पश्यमाना
गिरे: परं हर्षमवाप्य तस्थु:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस महान पर्वत के शिखर मोर और हंसों की ध्वनि से गूंज रहे थे। सर्वत्र सुन्दर पुष्प खिल रहे थे। उन सुन्दर शिखरों को देखते हुए पाण्डव बड़े आनन्द से वहाँ रहने लगे ॥4॥
 
The peaks of that great mountain were resonating with the sound of peacocks and swans. Beautiful flowers were growing everywhere. Looking at those beautiful peaks, the Pandavas started living there with great joy. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)