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mahabharat 3.164.2: वे सभी बड़े वीर थे। उनकी कामनाएँ बड़ी पवित्र थीं। वे तेजस्वी थे और सत्य तथा धैर्य उनके मुख्य गुण थे; इसलिए बहुत से गंधर्व और महर्षि उनसे प्रेमपूर्वक मिलने आने लगे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.164.2 
तान् वीर्ययुक्तान् सुविशुद्धकामां-
स्तेजस्विन: सत्यधृतिप्रधानान्।
सम्प्रीयमाणा बहवोऽभिजग्मु-
र्गन्धर्वसङ्घाश्च महर्षयश्च॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बड़े वीर थे। उनकी कामनाएँ बड़ी पवित्र थीं। वे तेजस्वी थे और सत्य तथा धैर्य उनके मुख्य गुण थे; इसलिए बहुत से गंधर्व और महर्षि उनसे प्रेमपूर्वक मिलने आने लगे॥ 2॥
 
All of them were very brave. Their desires were very pure. They were illustrious and truth and patience were their main qualities; therefore many Gandharvas and Maharishis started coming to meet them lovingly.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)