Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.164.15: जब तेजस्वी हाथी की चाल से चलने वाले अर्जुन अपने बड़े भाई युधिष्ठिर की अनुमति लेकर काम्यक वन से चले, तब समस्त पाण्डव शोक से व्याकुल हो गए ॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भ्रातुर्नियोगात् तु युधिष्ठिरस्य
वनादसौ वारणमत्तगामी।
यत् काम्यकात् प्रव्रजित: स जिष्णु-
स्तदैव ते शोकहता बभूवु:॥ १५॥
अनुवाद
जब तेजस्वी हाथी की चाल से चलने वाले अर्जुन अपने बड़े भाई युधिष्ठिर की अनुमति लेकर काम्यक वन से चले, तब समस्त पाण्डव शोक से व्याकुल हो गए ॥15॥
When Arjuna, who walked with the gait of a majestic elephant, took the permission of his elder brother Yudhishthira and left the Kamyak forest, all the Pandavas were overcome with grief. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥