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mahabharat 3.164.12: ‘हम सब लोग जो इस पर्वत पर आये हैं, शीघ्र ही शस्त्रविद्या सीखकर यहाँ आये हुए अर्जुन को देखकर महान आनन्द प्राप्त करें।’ इस प्रकार एक-दूसरे को शुभ कामनाएँ व्यक्त करते हुए सभी कुन्तीपुत्र तप और योगाभ्यास में लगे रहे। 12॥   |   mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.164.12 
इहैव हर्षोऽस्तु समागतानां
क्षिप्रं कृतास्त्रेण धनंजयेन।
इति ब्रुवन्त: परमाशिषस्ते
पार्थास्तपोयोगपरा बभूवु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘हम सब लोग जो इस पर्वत पर आये हैं, शीघ्र ही शस्त्रविद्या सीखकर यहाँ आये हुए अर्जुन को देखकर महान आनन्द प्राप्त करें।’ इस प्रकार एक-दूसरे को शुभ कामनाएँ व्यक्त करते हुए सभी कुन्तीपुत्र तप और योगाभ्यास में लगे रहे। 12॥
 
‘May all of us who have come to this mountain soon attain great joy by seeing Arjuna who has come here after learning the art of weaponry.’ In this way, expressing good wishes to each other, all the sons of Kunti remained engaged in the practice of penance and yoga. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)