Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.164.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उस पर्वत पर निवास करते हुए राजा गन्धमादन ने उत्तम व्रत का आश्रय लिया और अर्जुन को देखने की इच्छा रखने वाले महापुरुष पाण्डवों के हृदय में महान प्रेम और आनन्द उत्पन्न हुआ॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.164: पाण्डवोंकी अर्जुनके लिये उत्कण्ठा और अर्जुनका आगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उस पर्वत पर निवास करते हुए राजा गन्धमादन ने उत्तम व्रत का आश्रय लिया और अर्जुन को देखने की इच्छा रखने वाले महापुरुष पाण्डवों के हृदय में महान प्रेम और आनन्द उत्पन्न हुआ॥1॥
Vaishampayanji says- Janamejaya! While residing on that mountain king Gandhamadana, taking shelter of the best fast, great love and joy arose in the hearts of the great Pandavas who desired to see Arjuna. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥