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mahabharat 3.163.8: धर्मज्ञ राजा यम, जो सम्पूर्ण प्राणियों पर शासन करते हैं, इस दक्षिण दिशा में आश्रय लेते हैं। केवल मृत प्राणी ही वहाँ जा सकते हैं॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.163.8 
यमस्तु राजा धर्मज्ञ: सर्वप्राणभृतां प्रभु:।
प्रेतसत्त्वगतिं ह्येनां दक्षिणामाश्रितो दिशम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
धर्मज्ञ राजा यम, जो सम्पूर्ण प्राणियों पर शासन करते हैं, इस दक्षिण दिशा में आश्रय लेते हैं। केवल मृत प्राणी ही वहाँ जा सकते हैं॥8॥
 
‘The Dharma-knowing King Yama, who has authority over all creatures, takes shelter in this southern direction. Only dead beings can go there.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)