Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.163.33-34: इस प्रकार वे आलस्यरहित होकर इस महामेरा को पार करके सम्पूर्ण प्राणियों का पोषण करते हुए मंदराचल को लौट जाते हैं। उसी प्रकार अंधकार का नाश करने वाले भगवान सूर्य अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत का पोषण करते हुए इस बाधारहित मार्ग पर विचरण करते रहते हैं।॥ 33-34॥ | mahabharat अध्याय 3.163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार वे आलस्यरहित होकर इस महामेरा को पार करके सम्पूर्ण प्राणियों का पोषण करते हुए मंदराचल को लौट जाते हैं। उसी प्रकार अंधकार का नाश करने वाले भगवान सूर्य अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत का पोषण करते हुए इस बाधारहित मार्ग पर विचरण करते रहते हैं।॥ 33-34॥
‘In this way, without any laziness, after crossing this Mahamera, they go back to Mandarachal, nourishing all the creatures. In the same way, the Lord Sun, who destroys darkness, nourishes the entire world with his rays and keeps moving around on this obstacle-free path.॥ 33-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥