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mahabharat 3.163.14: जो ब्रह्मा के पुत्र कहे गए हैं और जिनमें दक्ष प्रजापति सातवें हैं। उन सभी प्रजापतियों के लिए भी यह महामेरु पर्वत रोग और शोक से रहित, सुखदायक स्थान है॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.163.14 
यानाहुर्ब्रह्मण: पुत्रान् मानसान् दक्षसप्तमान्।
तेषामपि महामेरु: शिवं स्थानमनामयम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो ब्रह्मा के पुत्र कहे गए हैं और जिनमें दक्ष प्रजापति सातवें हैं। उन सभी प्रजापतियों के लिए भी यह महामेरु पर्वत रोग और शोक से रहित, सुखदायक स्थान है॥ 14॥
 
‘Who are said to be the sons of Brahma and among whom Daksha Prajapati is the seventh. For all those Prajapatis also this Mahameru mountain is a pleasant place free from diseases and sorrows.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)