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mahabharat 3.162.35: वे धनपति कुबेर के घोड़े बादलों को घसीटते हुए और हवा पीते हुए बड़े वेग से आकाश में उड़ते थे ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.162.35 
ते जग्मुस्तूर्णमाकाशं धनाधिपतिवाजिन:।
प्रकर्षन्त इवाभ्राणि पिबन्त इव मारुतम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वे धनपति कुबेर के घोड़े बादलों को घसीटते हुए और हवा पीते हुए बड़े वेग से आकाश में उड़ते थे ॥35॥
 
Those horses of Kubera, the treasurer, flew across the sky at a great speed, dragging the clouds with them and drinking in the air. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)