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mahabharat 3.162.34: जैसे इन्द्रपुरी के मार्ग पर चलते हुए नाना प्रकार के वाहनों का कोलाहल सुनाई देता है, वैसे ही कुबेर के महल की ओर जाते हुए उत्तम घोड़ों की ध्वनि ऐसी प्रतीत होती थी मानो पक्षी उड़ रहे हों ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.162.34 
पक्षिणामिव निर्घोष: कुबेरसदनं प्रति।
बभूव परमाश्वानामैरावतपथे यथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्रपुरी के मार्ग पर चलते हुए नाना प्रकार के वाहनों का कोलाहल सुनाई देता है, वैसे ही कुबेर के महल की ओर जाते हुए उत्तम घोड़ों की ध्वनि ऐसी प्रतीत होती थी मानो पक्षी उड़ रहे हों ॥34॥
 
Just as the noise of the various vehicles moving on the road to Indrapuri can be heard, similarly the sound of the excellent horses travelling towards Kubera's palace seemed as if birds were flying. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)