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mahabharat 3.162.30: शत्रुओं को संताप देने वाले भरतकुलभूषण पाण्डवों! आप सब लोग अपने सुन्दर आश्रमों में निवास करें। यक्ष लोग आपकी मनोवांछित वस्तुओं की प्राप्ति में बाधा नहीं डालेंगे। 30॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.162.30 
स्वेषु वेश्मसु रम्येषु वसतामित्रतापना:।
कामान्न परिहास्यन्ति यक्षा वो भरतर्षभा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को संताप देने वाले भरतकुलभूषण पाण्डवों! आप सब लोग अपने सुन्दर आश्रमों में निवास करें। यक्ष लोग आपकी मनोवांछित वस्तुओं की प्राप्ति में बाधा नहीं डालेंगे। 30॥
 
‘Bharatkulbhushan Pandavas, who torment the enemies! All of you should reside in your beautiful ashrams. Yaksha people will not hinder you in achieving your desired things. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)