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mahabharat 3.162.25-26: महातपस्वी शांतनु ने यमुना नदी के तट पर देवताओं, पितरों, ऋषियों और ब्राह्मणों का पूजन कर सात महान अश्वमेध यज्ञ किए थे। हे राजन! आपके परदादा, राजाओं के राजा शांतनु, स्वर्ग को जीतकर वहीं निवास करते हैं। उन्होंने मुझसे आपका कुशल-क्षेम पूछा था।   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.162.25-26 
पितॄन् देवानृषीन् विप्रान् पूजयित्वा महातपा:।
सप्त मुख्यान् महामेधानाहरद् यमुनां प्रति॥ २५॥
अधिराज: स राजंस्त्वां शान्तनु: प्रपितामह:।
स्वर्गजिच्छक्रलोकस्थ: कुशलं परिपृच्छति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी शांतनु ने यमुना नदी के तट पर देवताओं, पितरों, ऋषियों और ब्राह्मणों का पूजन कर सात महान अश्वमेध यज्ञ किए थे। हे राजन! आपके परदादा, राजाओं के राजा शांतनु, स्वर्ग को जीतकर वहीं निवास करते हैं। उन्होंने मुझसे आपका कुशल-क्षेम पूछा था।
 
The great ascetic Shantanu worshipped the gods, ancestors, sages and Brahmins and performed seven great Ashwamedha Yajnas on the banks of the river Yamuna. O King! Your great grandfather, the great king of kings Shantanu, conquered the heaven and resides there. He had asked me about your well-being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)