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mahabharat 3.162.23-24: पार्थ! जिन्होंने धर्मपूर्वक समस्त राजाओं को वश में कर लिया था, वे तुम्हारे पिता के पितामह, परम प्रतापी, पराक्रमी और धर्मात्मा राजा शान्तनु स्वर्ग में कुरुवंश के नायक और गाण्डीवधारी अर्जुन पर अत्यन्त प्रसन्न हैं।॥23-24॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.162.23-24 
योऽसौ सर्वान् महीपालान् धर्मेण वशमानयत्।
स शान्तनुर्महातेजा: पितुस्तव पितामह:॥ २३॥
प्रीयते पार्थ पार्थेन दिवि गाण्डीवधन्वना।
सम्यक् चासौ महावीर्य: कुलधुर्येण पार्थिव:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! जिन्होंने धर्मपूर्वक समस्त राजाओं को वश में कर लिया था, वे तुम्हारे पिता के पितामह, परम प्रतापी, पराक्रमी और धर्मात्मा राजा शान्तनु स्वर्ग में कुरुवंश के नायक और गाण्डीवधारी अर्जुन पर अत्यन्त प्रसन्न हैं।॥23-24॥
 
Partha! The one who had righteously subjugated all kings, that very glorious, mighty and virtuous King Shantanu, who was your father's grandfather, is very pleased with the Kuru clan's leader and Gandiva-wielding Arjuna in heaven. ॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)