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mahabharat 3.162.22: कुरुकुल की कीर्ति बढ़ाने वाले अर्जुन इन्द्रभवन में देवताओं, पितरों और गन्धर्वों द्वारा सम्मानित होकर शस्त्रविद्या का अभ्यास करते हैं ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.162.22 
स देवपितृगन्धर्वै: कुरूणां कीर्तिवर्धन:।
मानित: कुरुतेऽस्त्राणि शक्रसद्मनि भारत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुरुकुल की कीर्ति बढ़ाने वाले अर्जुन इन्द्रभवन में देवताओं, पितरों और गन्धर्वों द्वारा सम्मानित होकर शस्त्रविद्या का अभ्यास करते हैं ॥22॥
 
India Arjun, who increased the fame of Kurukula, gets honored by the gods, ancestors and Gandharvas in Indra Bhavan and practices the art of weapons. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)