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mahabharat 3.162.2: हे भारत! सत्ययुग में सभी लोग धैर्यवान, अपने-अपने कार्यों में कुशल और पराक्रम के तरीकों को जानने वाले थे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.162.2 
धृतिमन्तश्च दक्षाश्च स्वे स्वे कर्मणि भारत।
पराक्रमविधानज्ञा नरा कृतयुगेऽभवन्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! सत्ययुग में सभी लोग धैर्यवान, अपने-अपने कार्यों में कुशल और पराक्रम के तरीकों को जानने वाले थे॥ 2॥
 
Bharat! In Satya Yuga all the people were patient, skilled in their respective tasks and knew the methods of bravery.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)