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mahabharat 3.162.15: पुरुषरत्न पाण्डवों! उसी प्रकार हमारे सेवक भी वहाँ तुम्हारे लिए सदैव प्रचुर मात्रा में स्वादिष्ट भोजन और पेय प्रस्तुत करेंगे॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.162.15 
तथैव चान्नपानानि स्वादूनि च बहूनि च।
आहरिष्यन्ति मत्प्रेष्या: सदा व: पुरुषर्षभा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पुरुषरत्न पाण्डवों! उसी प्रकार हमारे सेवक भी वहाँ तुम्हारे लिए सदैव प्रचुर मात्रा में स्वादिष्ट भोजन और पेय प्रस्तुत करेंगे॥15॥
 
Purusharatna Pandavas! Similarly, our servants will always present tasty food and drink in abundance for you there. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)