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श्लोक 3.162.14  |
अत: परं च वो राजन् द्रक्ष्यन्ति वनगोचरा:।
उपस्थास्यन्ति वो राजन् रक्षिष्यन्ते च व: सदा॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! अब से इस वन में निवास करने वाले सभी यक्ष आपकी देखभाल करेंगे, आपकी सेवा में उपस्थित रहेंगे और आप सबकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे॥ 14॥ |
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| O King! From now on all the Yakshas residing in this forest will look after you, will be present in your service and will always be ready to protect you all.॥ 14॥ |
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